बच्चों ने किया दुर्लभ पांडुलिपियों का अध्ययन

आनी (कुल्लू)। आनी मुख्यालय स्थित सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में एक दिवसीय पांडुलिपि प्रचार शिविर का आयोजन किया गया। हिम संस्कृति के प्रबंधक दीवान राजा ने बताया कि कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को प्राचीन शिक्षा पद्धति और 200 साल पुरानी हस्तलिखित पुस्तकों की जानकारी दी गई। इस मौके पर प्रदर्शनी भी लगाई गई। ज्योतिष, कर्मकाण्ड, रामायण, महाभारत आदि ग्रंथ टांकरी लिपि में लिखे गए हैं। इनका अुनवाद हिंदी में किया जा रहा है। कुल्लू के टांकरी विद्वान खूबराम खुशदिल की अगुवाई में प्रदेश भर के विद्वान काम कर रहे हैं। आउटर सिराज क्षेत्र के 20 देवी देवताओं के मंदिरों में लिखे इतिहास की जानकारी भी जुटाई गई है। संस्था पांडुलिपियों पर सर्वेक्षण कर रही है। हिम संस्कृति संस्था के अध्यक्ष एसआर शर्मा ने कहा कि आनी विधानसभा क्षेत्र के सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों में छात्र छात्राओं को प्राचीन लिपियों और पांडुलिपियों की जानकारी दी जा रही है। सरस्वती विद्या मंदिर के स्कूली छात्र छात्राओं ने प्रदर्शनी की सभी पांडुलिपियों को जानने एवं ज्ञान पाने की इच्छा जताई है। पांडुलिपियों की जानकारी बारे बताया गया कि प्रदेश के हर जिले में टांकरी, भोटी, शारदा, ब्राम्ही आदि लिपियों का चलन अधिक था। जो अब विलुप्त हो गई हैं। शिविर में स्कूल के प्रभारी रतन चंद, शिक्षक यशपाल, शास्त्री लायकराम, स्वाति शर्मा, रोहिणी ठाकुर, दयानंद और दसवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं ने पांडुलिपियों के अध्ययन पर काम किया। इसमें रजनीश, अजय, हितेश्वर, सरस्वती, प्रगति, राजकुमारी और नेहा आदि शामिल हुए।

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